अयोध्या। जनपद में सरकारी टेंडरों की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। नलकूप निर्माण खंड-5 में टेंडर फॉर्म वितरण को लेकर विवाद सामने आया है। ठेकेदार दिवाकर सिंह ने विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत सीधे उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव से जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से की है। दिवाकर सिंह का आरोप है कि विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार टेंडर फॉर्म 9 जून की शाम 5 बजे तक बेचे जाने थे। निर्धारित समय के भीतर वह फॉर्म लेने कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां मौजूद कैशियर ने उन्हें फॉर्म देने के बजाय “साहब से बात करने” की बात कहकर टाल दिया। आरोप है कि काफी इंतजार के बावजूद उन्हें टेंडर फॉर्म नहीं दिया गया, जिससे वह निविदा प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित रह गए। पीड़ित ठेकेदार का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी अयोध्या से भी की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में मनमानी की जा रही है, जिससे प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता दोनों प्रभावित हो रही हैं। दिवाकर सिंह ने मांग की है कि विवादित टेंडर को तत्काल निरस्त कर पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से दोबारा कराया जाए, ताकि सभी पात्र ठेकेदारों को समान अवसर मिल सके। वहीं दूसरी ओर, नलकूप निर्माण खंड-5 के अधिकारियों ने लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए किसी भी प्रकार की अनियमितता से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय प्रक्रिया नियमानुसार संचालित की गई है। अब यह मामला जनसुनवाई पोर्टल तक पहुंचने के बाद चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह है कि यदि टेंडर फॉर्म वितरण में कोई गड़बड़ी नहीं हुई, तो निर्धारित समय पर पहुंचे ठेकेदार को फॉर्म क्यों नहीं मिला? और यदि आरोप सही हैं, तो क्या विभागीय स्तर पर किसी बड़े खेल की तैयारी थ। फिलहाल निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सिर्फ एक टेंडर विवाद नहीं, बल्कि सरकारी निविदाओं की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल साबित हो सकता है।