गांडेय / राजु मंडल।सरकारी सिस्टम की नाकामी का एक और जीता-जागता सबूत गांडेय प्रखंड के मैदनीसारे गांव में देखने को मिल रहा है। यहाँ जयति नदी के किनारे, आदिवासी और अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाके में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 13 करोड़ 65 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से एक आलीशान डिग्री महाविद्यालय का निर्माण किया गया था।
लगभग 76 कमरों की यह चमचमाती इमारत दो साल पहले ही बनकर पूरी तरह तैयार हो चुकी है। लेकिन अफ़सोस, आज तक इस कॉलेज में न तो कोई प्रोफेसर पहुंचा और न ही किसी छात्र की किताब खुली। करोड़ों की लागत से बना यह आलीशान कॉलेज आज सिर्फ एक प्राइवेट गार्ड के भरोसे लावारिस छोड़ दिया गया है।
*अपराधियों का 'सेफ जोन' बनने का डर, ग्रामीणों की उड़ी नींद*
इस बंद पड़ी इमारत की वजह से स्थानीय लोगों की रातों की नींद उड़ी हुई है। ग्रामीणों का यह डर बेबुनियाद नहीं है, बल्कि इसके पीछे दो मुख्य और गंभीर वजहें हैं,
महज दो महीने पहले, पुलिस ने इसी महाविद्यालय के ठीक बगल से दो वाहनों में भारी मात्रा में नकली शराब और शराब बनाने की सामग्री जब्त की थी। ग्रामीणों को डर है कि जब तक कॉलेज बंद रहेगा, यह सुनसान इलाका अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना रहेगा।
*इतिहास दोहराने का खौफ।*
गांडेय के लोग पहले भी सिस्टम का यह क्रूर मजाक देख चुके हैं। 16 साल पहले करोड़ों की लागत से बना महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज आज चालू न होने की वजह से 'भूत बंगला' बन चुका है, जहां सिर्फ शराबी और जुआरी महफिल जमाते हैं। ग्रामीणों को डर है कि इस 13 करोड़ी डिग्री कॉलेज का हश्र भी वैसा ही न हो जाए।
*रफ्तार मीडिया के तीखे सवाल*
सवाल 1: जब कॉलेज चालू ही नहीं करना था, तो जनता की गाढ़ी कमाई के ₹13.65 करोड़ जयति नदी के किनारे क्यों बहा दिए गए?
सवाल 2: क्या शिक्षा विभाग यहाँ के युवाओं को बगैर डिग्री के अनपढ़ ही रखना चाहता है?
सवाल 3: क्या प्रशासन अब इस नए कॉलेज को भी शराब माफियाओं और जुआरियों के हवाले सौंपने का इंतजार कर रहा है?
भाजपा के देवघर जिला प्रभारी यदुनंदन पाठक,तीखे सवार में कहा है
युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं.
यह सरकार की घोर लापरवाही है। एक तरफ हमारे युवा उच्च शिक्षा के लिए तरस रहे हैं, दूसरी तरफ 13 करोड़ की बिल्डिंग भूत बंगला बनने के लिए छोड़ दी गई है। अगर इसे तुरंत चालू नहीं किया गया, तो पार्टी चुप नहीं बैठेगी।
*जनता की मांग: फाइलों से बाहर निकले सरकार*
'रफ्तार मीडिया' प्रशासन और सूबे के शिक्षा मंत्री से सीधे मांग करता है कि कागजी फाइलों से बाहर निकलिए। इसी शैक्षणिक सत्र से गांडेय के इस डिग्री कॉलेज का ताला खोलकर पढ़ाई शुरू करवाई जाए, ताकि हमारे इलाके के युवाओं का भविष्य 'भूत बंगला' बनने से बच सके और उन्हें अपने ही घर के पास उच्च शिक्षा मिल सके।