धनबाद: 21वीं सदी में जहाँ 'हर घर नल का जल' पहुँचाने का दावा किया जा रहा है, वहीं धनबाद के पूर्वी टुंडी से मानवता को शर्मसार करने वाली खबर आई है। लाहबेड़ा गांव में आपसी विवाद के बाद **'ऊपर टोला'** के लोगों ने *'नीचे टोला'* के दर्जनों परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया है। आलम यह है कि इन परिवारों के लिए सार्वजनिक जल स्रोतों से पानी लेना भी गुनाह हो गया है।
*संसाधनों पर 'तालाबंदी', बूंद-बूंद को तरस रहे ग्रामीण**
लाहबेड़ा के नीचे टोला के निवासियों का आरोप है कि गांव के दबंगों ने उन्हें सरकारी संसाधनों से बेदखल कर दिया है। गांव में मौजूद:
*01 सरकारी चापाकल**
*04 सरकारी कुएं**
* **02 तालाब**
इन सभी पर दूसरे पक्ष ने कब्जा जमा लिया है। पीड़ितों का कहना है कि जब वे पानी लेने जाते हैं, तो उनके साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया जाता है। प्यास बुझाने के लिए अब इन ग्रामीणों के पास थाने के चक्कर काटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
**थाने पहुँचे ग्रामीण: "क्या पानी पर भी किसी का हक है?"**
न्याय की गुहार लगाने पूर्वी टुंडी थाना पहुँचे ग्रामीणों में मानसिंह सोरेन, बाबूजन सोरेन, सुखदेव मरांडी और अनिल हंसदा समेत भारी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। बहामुनि देवी और मीना देवी ने रोते हुए बताया कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए उन्हें अपमानित किया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें इस 'सामाजिक कैद' से आजाद कराया जाए।
**पुलिस की सख्त चेतावनी: कुरीति फैलाने वालों की खैर नहीं**
मामले को संज्ञान में लेते हुए पूर्वी टुंडी थाना प्रभारी **नीतीश कुमार** ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी जल स्रोतों पर किसी एक पक्ष का एकाधिकार नहीं हो सकता। पुलिस दोषियों को चिन्हित कर रही है और सामाजिक वैमनस्य फैलाने वालों के खिलाफ **कठोर कानूनी कार्रवाई** की तैयारी में है।
धनबाद रफ्तार मीडिया संवाददाता गोवर्धन रजक की रिपोर्ट।