मोतिहारी।
बरसात का मौसम शुरू होते ही पूर्वी चंपारण जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जहरीले सांपों के निकलने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। ऐसे समय में वन विभाग की तत्परता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। ताजा मामला मोतिहारी शहर से लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित पटखौलिया हनुमान मंदिर के समीप का है, जहां सांप निकलने की सूचना वन विभाग को तत्काल दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के लगभग दो घंटे बाद तक भी वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची, जिससे लोगों में भय और नाराजगी का माहौल बन गया।
घटना के दौरान मंदिर परिसर और आसपास बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। सांप के निकलने की सूचना फैलते ही लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग सुरक्षित दूरी बनाकर खड़े रहे, जबकि कुछ लोग लगातार वन विभाग की टीम के आने का इंतजार करते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सांप किसी घर में घुस जाता या किसी व्यक्ति को डस लेता, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में खेतों, बगीचों और घरों में सांप निकलना सामान्य बात है। आने वाले दिनों में सावन माह शुरू होने वाला है, जब मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में यदि समय पर सर्प पकड़ने वाली टीम उपलब्ध नहीं होगी तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
जब इस संबंध में वन विभाग के एक कर्मी से फोन पर बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि वन विभाग में कर्मियों की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि वह अकेले कई क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और घटना के समय किसी अन्य स्थान पर सर्प पकड़ने के कार्य में व्यस्त थे। ऐसे में तुरंत घटनास्थल पर पहुंच पाना संभव नहीं हो सका।
यह जवाब अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या किसी जहरीले सांप से सामना होने पर वह दो घंटे तक किसी टीम का इंतजार करेगा? क्या किसी बच्चे, बुजुर्ग या महिला की जान जोखिम में पड़ने के बाद ही विभाग सक्रिय होगा? यदि किसी व्यक्ति की सर्पदंश से मृत्यु हो जाती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—वन विभाग की या जिला प्रशासन की?
ग्रामीणों का कहना है कि जिस प्रकार डायल-112 पुलिस आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देती है, उसी प्रकार वन विभाग के पास भी प्रत्येक प्रखंड स्तर पर प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यू टीम होनी चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में यदि एक या दो कर्मियों पर पूरे जिले की जिम्मेदारी है तो यह व्यवस्था आम लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि सांप दिखाई देने पर लोग घबराकर उसे मारने की कोशिश करते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। यदि प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम समय पर पहुंचे तो न केवल लोगों की जान बचाई जा सकती है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकता है। भारतीय कानून के तहत अधिकांश सांप संरक्षित वन्यजीव हैं और उन्हें बिना कारण मारना भी उचित नहीं माना जाता।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि वन विभाग प्रत्येक प्रखंड में कम से कम एक प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यू टीम की तैनाती करे। साथ ही एक ऐसा हेल्पलाइन तंत्र विकसित किया जाए, जिससे सूचना मिलते ही निर्धारित समय के भीतर टीम मौके पर पहुंचे। लोगों का कहना है कि केवल कर्मियों की कमी का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से भी हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पुलिस, एंबुलेंस और अग्निशमन सेवाओं की तरह वन विभाग की आपातकालीन सेवा भी मजबूत नहीं की गई तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी सौरव सुमन यादव से आग्रह किया है कि पूरे जिले में वन विभाग की व्यवस्था की समीक्षा कर प्रत्येक प्रखंड में पर्याप्त संख्या में सर्प रेस्क्यू कर्मियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही आवश्यक वाहन, उपकरण और त्वरित सूचना प्रणाली विकसित की जाए ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
यह घटना केवल एक सांप निकलने की सूचना तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले की आपदा एवं वन्यजीव बचाव व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करती है। बरसात और सावन के दौरान यदि व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता