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SIR in Bengal: फाइनल Voter List से पहले चौंकाने वाले मामले, एक महीने में दो बच्चों का जन्म और जन्म से पहले बना प्रमाणपत्र

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चल रहा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision – SIR) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। 28 फरवरी तक फाइनल वोटर लिस्ट (Final Voter List) प्रकाशित की जानी है, जबकि 21 फरवरी तक हर हाल में सभी मामलों की सुनवाई (Hearing) पूरी करनी है।

चुनाव आयोग के अनुसार लगभग 32 लाख नाम अनमैप्ड श्रेणी (Unmapped Category) में हैं, जिनका सत्यापन किया जाना बाकी है। ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को इन मामलों की जांच में भारी मशक्कत (Verification Process) करनी पड़ रही है।

इस दौरान आयोग को कई ऐसे मामले मिले हैं, जिन्होंने सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं दो बच्चों के जन्म के बीच बेहद कम अंतर पाया गया है तो कहीं जन्म से पहले ही बर्थ सर्टिफिकेट (Birth Certificate) जारी होने का मामला सामने आया है।

एक महीने के भीतर दो बच्चों का जन्म (Two Births in One Month)

अंग्रेजी दैनिक इकोनॉमिक टाइम्स (Economic Times) की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता के दक्षिणी बाहरी इलाके मेटियाबुरूज में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला के दो बेटों की जन्मतिथि में एक महीने से भी कम का अंतर दर्ज है।

दस्तावेजों के अनुसार बड़े बेटे एसके इरशाद की जन्मतिथि 5 दिसंबर 1990 और छोटे बेटे शेख नौसेद की जन्मतिथि 1 जनवरी 1991 दर्ज की गई है। यानी मात्र 27 दिनों के भीतर दो बच्चों का जन्म दिखाया गया है।

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि परिवार के सभी 10 सदस्यों की पहचान हो चुकी है। सुनवाई के दौरान जमा किए गए सभी गिनती फॉर्म (Counting Forms) और दस्तावेजों में पिता का नाम एसके अब्दुल और मां का नाम मनोवारा बीबी लगातार दर्ज पाया गया।

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इस परिवार के 10 बच्चों में से 4 बच्चों की जन्मतिथि 1 जनवरी दर्ज है, जो डेटा एंट्री (Data Entry) और प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।

जन्म से पहले बना बर्थ सर्टिफिकेट (Certificate Issued Before Birth)

ऐसा ही एक और मामला नॉर्थ 24 परगना जिले के बारानगर से सामने आया है। यहां एक व्यक्ति का बर्थ सर्टिफिकेट उनके जन्म से दो दिन पहले जारी किया गया।

जांच में पाया गया कि पपील सरकार द्वारा जमा किए गए दस्तावेज में उनकी जन्मतिथि 6 मार्च 1993 दर्ज है, लेकिन उनका बर्थ सर्टिफिकेट 4 मार्च 1993 को रजिस्टर किया गया था। यानी जन्म से पहले ही प्रमाणपत्र बना दिया गया।

इसके अलावा एक वोटर को SIR 2002 के तहत 5 साल की उम्र में मैप किया गया, जबकि दूसरा व्यक्ति 13 साल का पाया गया। इन विसंगतियों के कारण पूरे मामले को इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (Electoral Registration Officer – ERO) के पास भेजा गया है।

वेरिफिकेशन प्रक्रिया से बढ़ी देरी (Delay due to Verification)

SIR में लगे एक अधिकारी ने बताया कि इस तरह के मामलों को संबंधित हॉस्पिटल अथॉरिटी (Hospital Authority) और रिकॉर्ड विभाग से वेरिफाई किया जा रहा है।
हर केस की अलग-अलग जांच होने के कारण पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग रहा है और इसी वजह से फाइनल लिस्ट तैयार करने में देरी हो रही है।

चुनाव आयोग का कहना है कि किसी भी गलत या फर्जी प्रविष्टि को हटाकर ही शुद्ध वोटर लिस्ट (Clean Voter List) तैयार की जाएगी, ताकि आगामी चुनावों में पारदर्शिता बनी रहे।

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