मोतिहारी
जन शिक्षा निदेशालय ने शिक्षा सेवक एवं तालीमी मरकज के कार्यों में शिथिलता पर सख्त रुख अपनाते हुए सभी कर्मियों को निर्धारित दायित्वों का समय पर निर्वहन करने का निर्देश दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 6-14 वर्ष के बच्चों को विद्यालय के लिए तैयार करना, ड्रॉपआउट बच्चों का नामांकन कराना, असाक्षर महिलाओं को साक्षर बनाना तथा आवश्यकता पड़ने पर कक्षा 1 और 2 का पठन-पाठन कराना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियां हैं।
हालांकि, मोतिहारी जिला सहीत प्रखंड सहित कई क्षेत्रों में जमीनी स्थिति विभागीय दावों से अलग दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकांश टोला सेवक नियमित रूप से अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं और कुछ गिने-चुने कर्मी ही सक्रिय हैं। विभाग द्वारा मानदेय बढ़ाए जाने के बावजूद कार्यों में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।
लोगों का कहना है कि यदि शिक्षा विभाग के निर्देशों का सही पालन हो रहा है तो प्रखंड स्तर पर नियमित निरीक्षण और जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी द्वारा शिक्षा सेवकों के कार्यों की नियमित जांच की जा रही है, या फिर पूरी व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रह गई है। अब विभागीय निर्देशों के बाद जमीनी स्तर पर कार्रवाई और निगरानी पर सबकी नजर रहेगी। पूछता है रफ्तार मीडिया मोतिहारी ओम प्रकाश तिवारी