सौरभ राय/ रफ्तार मीडिया

रांची: सम्पूर्ण जगत के स्वामी भगवान जगन्नाथ को समर्पित त्यौहार रथ यात्रा महोत्सव का आगाज राजधानी रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में गुरुवार को प्रारंभ  हो चुका है। भगवान जगन्नाथ के अलौकिक दर्शन के लिए जगन्नाथ मंदिर में प्रातः 5 बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी जो अपराह्न 2 बजे तक सुलभ रहा। संध्या लगभग 5 बजे  राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और राज्यपाल संतोष गंगवार भगवान जगन्नाथ के रथ के समीप पहुंचे जहां विधि विधान से पूजा अर्चना करने के बाद महाप्रभु जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र की विधिवत पूजा अर्चना कर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पारंपरिक विधि विधान के साथ भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचकर रथयात्रा का शुभारंभ किया।

प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने रथ खींचकर अपनी आस्था को किया उजागर

बता दें, राजधानी रांची में आयोजित होने वाली रथ यात्रा महोत्सव में प्रत्येक वर्ष कि भांति इस वर्ष भी राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा खुद भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथ को खींचकर अपनी आस्था को उजागर किया गया। इस दौरान लाखों के संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच आस्था और अनुशासन का अटूट संगम देखने को मिला लोग संयमित होकर भगवान के भव्य रथ यात्रा को देख रहे थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राज्यवासियों को रथयात्रा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व भक्ति, समर्पण और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

जगन्नाथपुर मंदिर मार्ग पर भव्य तोरणद्वार का निर्माण किया जाएगा- मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

रथयात्रा समारोह में शामिल हुए राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने जगन्नाथपुर मंदिर के विकास को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की है। अपने संबोधन में ऐलान करते हुए कहा कि राज्य सरकार भगवान जगन्नाथ को समर्पित इस मंदिर की भव्यता और पहचान को और मजबूत करने के लिए मंदिर को जोड़ने वाली सड़क पर एक भव्य तोरणद्वार का निर्माण कराएगी, ताकि दूर से ही जगन्नाथपुर मंदिर की पहचान हो सके।मुख्यमंत्री ने कहा कि जगन्नाथपुर मंदिर झारखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। इसे पर्यटन के मानचित्र पर और प्रभावी ढंग से स्थापित करने की दिशा में सरकार लगातार कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि रथयात्रा महोत्सव का श्रद्धालु पूरे वर्ष इंतजार करते हैं और आज उमड़ी भारी भीड़ इस धार्मिक आयोजन की लोकप्रियता और आस्था का प्रमाण है। भविष्य में इस मेले को और अधिक व्यवस्थित, भव्य और प्रभावी बनाया जाएगा।

335 वर्ष पुराना है जगन्नाथ मंदिर का इतिहास

राजधानी रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर का इतिहास बेहद पुराना है मंदिर के प्रथम सेवक ठाकुर सुधांशुनाथ शाहदेव के अनुसार 335 वर्ष पूर्व स्वर्गीय ठाकुर एनिनाथ शाहदेव के स्वपन में प्रभु जगन्नाथ आकर यहीं बड़कागढ़ ( जगन्नाथपुर) की धरती में अपने मंदिर के निर्माण के लिए आदेश दिया जिसके बाद पूरी धाम के तर्ज पर ही  भगवान जगन्नाथ की मंदिर का निर्माण कराया गया और उसी समय से रथ यात्रा की परम्परा की भी शुरुवात की गई। उन्होंने बताया 335 वर्ष पुरानी परंपरा को आज भी पूरी विधि विधान के साथ मनाया जा रहा है।

जय जगन्नाथ के नारों के साथ श्रद्धालुओं ने प्रभु को किया नमन

रथयात्रा के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु जगन्नाथपुर मंदिर परिसर और रथ मार्ग पर मौजूद रहे। भक्तों ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त किया। इस दौरान आम हो या खास सभी ने एक साथ जय जगन्नाथ के नारे लगाकर प्रभु जगन्नाथ को नमन किया यह नजारा अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण और खास रहा।  भगवान जगन्नाथ स्वामी अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ अपने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करते हुए लगभग संध्या 7 बजे मौसीबाड़ी पहुंचे जहां उन्हें विराजमान कराया गया और रात्रि 8 बजे मुख्य पुजारी रामेश्वर पाढ़ी के नेतृत्व में पूरे विधि विधान के साथ भगवान की 108 मंगल आरती की गई जिसके बाद भक्तों के लिए दर्शन बंद किया गया।