दीनबंधु राउत / रफ्तार मीडिया संवाददाता जामताड़ा :जामताड़ा जिले में कबड्डी संघ के गठन को लेकर विवाद गहरा गया है। एक ओर जामताड़ा जिला कबड्डी संघ ने हाल ही में गठित नए कबड्डी एसोसिएशन की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे खिलाड़ियों को गुमराह करने का प्रयास बताया है, वहीं नवगठित जामताड़ा कबड्डी एसोसिएशन ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद करार दिया है। गांधी मैदान में जामताड़ा जिला कबड्डी संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता डॉ. डी. डी. भंडारी ने की। बैठक में जिले के कई पूर्व एवं वर्तमान कबड्डी खिलाड़ी उपस्थित रहे। इस दौरान संघ के सदस्य करण राउत ने आरोप लगाया कि कुछ लोग फर्जी राज्य कबड्डी संघ के नाम पर खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को आयोजित एक बैठक में बिना किसी मान्यता के जिला कबड्डी संघ की नई कमेटी का गठन किया गया, जिसमें जीतू सिंह को अध्यक्ष, राहुल सिंह को सचिव तथा सुकुमार मंडल को कोषाध्यक्ष बनाया गया। करण राउत के अनुसार बाहरी तत्व कबड्डी के नाम पर आर्थिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से समानांतर संगठन खड़ा कर रहे हैं, जिससे खिलाड़ियों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने दावा किया कि कबड्डी से संबंधित केंद्रीय संस्था एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया तथा भारतीय ओलंपिक संघ से संबद्ध झारखंड ओलंपिक संघ द्वारा मान्यता प्राप्त एकमात्र संगठन कबड्डी एसोसिएशन ऑफ झारखंड है। उन्होंने खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों से केवल मान्यता प्राप्त संगठन के माध्यम से ही खेल गतिविधियों में भाग लेने की अपील की। वहीं दूसरी ओर नवगठित जामताड़ा कबड्डी एसोसिएशन के अध्यक्ष जीतू सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि उनके संगठन पर लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जामताड़ा कबड्डी एसोसिएशन का गठन झारखंड राज्य कबड्डी संघ के निर्देशानुसार किया गया है। वही जीतू सिंह ने कहा कि झारखंड राज्य कबड्डी संघ सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत निबंधित एक वैधानिक खेल संस्था है, जो वर्ष 2000 से राज्य में कबड्डी खेल के विकास, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभा रही है।उन्होंने यह भी कहा कि एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक और संगठनात्मक मामले वर्तमान में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। ऐसे में खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल प्रेमियों को किसी भी प्रकार की अपुष्ट या भ्रामक जानकारी से बचते हुए न्यायालय के अंतिम निर्णय का इंतजार करना चाहिए। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं।ऐसे में जिले के कबड्डी खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों की निगाहें अब संबंधित खेल प्राधिकरणों और न्यायालय के आगामी निर्णयों पर टिकी हुई हैं।