रामगढ़ : 6 अप्रैल 2026 की सुबह झारखंड इस्पात संयंत्र में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट ने पांच परिवारों की दुनिया उजाड़ दी थी। पांच मजदूरों की दर्दनाक मौत के बाद मुआवजे और हरसंभव सहायता के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन तीन महीने बाद जब पीड़ित परिवारों की हकीकत जानने टीम उनके घर पहुंची तो तस्वीर बेहद दर्दनाक मिली।
महुआ टाड गांव निवासी मृतक बृजलाल बेदिया के घर में आज भी मातम पसरा है। परिवार का कहना है कि बृजलाल ही घर का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। इससे पहले उनके बड़े भाई की भी मौत हो चुकी थी। दो बेटों को खोने का सदमा उनकी वृद्ध मां सहन नहीं कर सकीं और मानसिक संतुलन बिगड़ने के बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया। महज कुछ महीनों में इस परिवार ने तीन-तीन अपनों को खो दिया।
21 लाख मिले, लेकिन जिंदगी का सहारा छिन गया
हादसे के बाद विरोध-प्रदर्शन के बीच खनन मंत्री के सामने प्रबंधन ने प्रत्येक मृतक परिवार को 21 लाख रुपये देने की घोषणा की थी। साथ ही आश्वासन दिया गया था कि मृतक मजदूर का मासिक वेतन पेंशन के रूप में पत्नी और बच्चों को मिलेगा। लेकिन परिजनों का आरोप है कि आज तक न तो नियमित वेतन मिला और न ही पेंशन जैसी कोई व्यवस्था लागू हुई।
परिवार का कहना है कि जो बकाया भुगतान था, उसे लेने के लिए भी उन्हें महीनों तक फैक्ट्री के चक्कर लगाने पड़े।
"21 लाख में क्या पूरी जिंदगी कट जाएगी?"
बृजलाल की पत्नी सुषमा देवी रोते हुए कहती हैं कि पति के बाद अब सास भी इस दुनिया में नहीं रहीं। घर में छोटे बच्चे का पालन-पोषण, पढ़ाई और भविष्य की चिंता हर दिन सताती है। उनका सवाल है कि क्या केवल 21 लाख रुपये देकर कंपनी अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो सकती है?
भाई बोला—"अब पूरा परिवार मेरे सहारे"
मृतक के भाई अमित बेड़िया का कहना है कि अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई है। उनका आरोप है कि कंपनी मजदूरों को बोर्ड पर लिखे वेतन से कम भुगतान करती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संयंत्र में पुराने बॉयलर और मशीनों पर मजदूरों से काम कराया जाता है, जिससे पहले भी कई हादसे हो चुके हैं।झारखंड इस्पात संयंत्र में जो भी मजदूर आवाज उठाता है या तो उसे बाहर भेज दिया जाता है और नहीं तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है
नेताओं की भी नहीं लौटी सुध
हादसे के बाद सत्ता और विपक्ष के कई नेता पीड़ित परिवारों के घर पहुंचे थे। बड़े-बड़े आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तीन महीने बाद किसी ने भी परिवारों की सुध नहीं ली। पीड़ित परिवारों का कहना है कि हादसे के समय सभी ने संवेदना जताई, लेकिन आज कोई हालचाल पूछने तक नहीं आया।
तिवारी महतो का आरोप
मांडू विधायक तिवारी महतो ने कहा कि मृतक परिवारों को मिला 21 लाख रुपये झारखंड इस्पात प्रबंधन द्वारा दिया गया था। उनका आरोप है कि सरकार ने अलग से कोई आर्थिक सहायता नहीं दी। उन्होंने कहा कि वह पहले भी पीड़ित परिवारों के साथ थे, आज भी हैं और आगे भी उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहेंगे।तिवारी महतो ने कहा जो झारखंड खनन मंत्री जो आए थे झारखंड इस्पात फैक्ट्री के प्रबंधक कमेटी द्वारा एक 21 लाख रुपए सभी पीड़ित परिवार के दिया था ना ही झारखंड सरकार दिया था बल्कि संजय यादव खुद यहां से प्रबंधक से करोड़ रूपया लपेट के ले गए इस मृतक परिवारों के बहाने से
सबसे बड़ा सवाल
पांच मजदूरों की मौत के बाद आखिर सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव हुआ? क्या पुराने बॉयलरों को बदला गया? क्या मजदूर आज भी उसी खतरे के बीच काम करने को मजबूर हैं? और सबसे बड़ा सवाल—क्या 21 लाख रुपये देकर किसी परिवार के उजड़े जीवन की भरपाई की जा सकती है?