बीजेपी के बहिष्कार से खटाई मे पडी सर्वदलीय बैठक, मुख्यमंत्री बोले सरकार भाजपा के बिना ही प्रदेश हित मे लडेगी लड़ाई
शिमला। रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने हिमाचल सरकार द्धारा बुलाई सर्वदलीय बैठक खटाई मे पड गई है। सरकार का उद्देश्य था कि सभी राजनीतिक दल मिलकर राज्य के आर्थिक संकट और RDG (राजस्व घाटा अनुदान) बंद होने जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करें। लेकिन इसी बीच बीजेपी ने बैठक मे अमर्यादित भाषा का प्रयोग किए जाने के आरोप लगाए और बैठक का बहिष्कार कर दिया। भाजपा पक्षकारो ने दलील दी कि एक तरफ सरकार आर्थिक संकट से निपटने के लिए सर्वदलीय सहमति चाहती है, तो दूसरी तरफ केंद्र की भाजपा सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप लगा रही है। बैठक संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी भाजपा पर खूब बरसे। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का सहयोग नहीं कर रही है और जनता भी इन्हें नकार देगी। सरकार की ओर से प्रस्तावित किया गया कि प्रदेश आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है और ऐसे समय में सभी दलों को एकजुट होकर समाधान निकालना चाहिए। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि भाजपा के कहने पर ही यह सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी। लेकिन बैठक में भाजपा प्रतिनिधि अपनी बात रखे बिना ही विरोध जताकर बाहर चले गए। सरकार के नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा का बहिष्कार पहले से तय था। उनका कहना है कि भाजपा बैठक में सिर्फ औपचारिकता निभाने आई और फिर राजनीतिक ड्रामा कर बाहर निकल गई।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिह सुक्खू ने बैठक मे उपस्थिती हेतु सभी राजनैतिक दलो का आभार जताया। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए सीएम सुक्खू ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार पर निशाना साधा और विपक्ष पर जनता के मुद्दों से भागने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें भी पिछली सरकार की तरह 40 हजार करोड़ रुपये मिलते, तो वे प्रदेश के आधे कर्ज का भुगतान कर देते। सुक्खू ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार आर्थिक कुप्रबंधन छोड़ गई है, जिसका बोझ वर्तमान सरकार उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ समाधान तलाशना चाहती है और विपक्ष को राजनीति से ऊपर उठकर राज्यहित में सहयोग करना चाहिए। उन्होने बताया कि बैठक में CPIM, आम आदमी पार्टी और BSP ने हिस्सा लिया और RDG के मुद्दे पर अपनी राय रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि RDG बंद होना सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की लड़ाई है। उन्होंने भाजपा से साफ पूछा कि वह RDG बंद होने के पक्ष में है या विरोध में। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करे। सुक्खू ने यह भी कहा कि अगर भाजपा चाहती तो बैठक मंडी या सोलन में भी रखी जा सकती थी, सरकार इसके लिए तैयार थी। लेकिन भाजपा का रवैया प्रदेश हित में नहीं दिखा। उन्होने बीजेपी प्रतिनिधियो को खरी खोटी सुनाते हुए कहा कि बीजेपी प्रतिनिधियो को सबसे पहले बोलने का मौका दिया गया था लेकिन उन्होने पहले बोलने से इंकार कर दिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि माकपा प्रतिनिधी राकेश सिंघा ने हिमाचली हित का समर्थन किया और कहा कि सरकारे आती जाती रहेंगी, लेकिन हमे सर्वप्रथम प्रदेश के हित अधिकार साधने की आवश्यक्ता है। आरडीजी संविधान के अंतर्गत प्रदान किए जाने वाला अधिकार है। राजस्व लाभ और घाटे के बीच की कमी को दूर करने के लिए आरडीजी प्रदान की जाती रही है। और यह अनुदान 1952 से प्रदान किया जा रहा है। इसलिए निश्चित तौर पर बीजेपी इस विषय पर आगे आए। मुख्यमंत्री ने बताया कि आम आदमी पार्टी द्धारा भी इस विषय का समर्थन किया गया। उन्होने कहा कि यह अनुदान नही बल्की जन अधिकार है। हिमाचल की दुसरे राज्यो के साथ तुलना नही की जा सकती। वित सचिव ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सवाल यह नही है कि आम आदमी पार्टी सत्ता मे नही है या इनके विधायक नही है। अलबत्ता यह भी लोकतंत्र मे जनता की एक आवाज है। बीएसपी ने भी बीजेपी और कांग्रेस को प्रदेश के बडे राजनैतिक दल करार देकर उनके नेतृत्व मे सहयोग की बात कही। कांग्रेस ने विधायक कुलदीप राठौर के नेतृत्व मे अपना मत प्रस्तुत किया। फिर बीजेपी के बोलने की बात आई तो उन्होने अपनी उपलब्धिया गिनवानी शुरु कर दी। और फौरलेन, सेंटर सपोंसर स्कीम समेत हजारो करोडो रुपये दिए जाने की बात कही। लेकिन आरडीजी पर अपना कोई रुख स्पष्ट नही कर पाए और बहानेबाजी कर बैठक से उठकर चले गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश बड़ा है या कुर्सी, इसका फैसला जनता करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार भाजपा के बिना भी प्रदेश हित की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ेगी।
संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि इन दलों ने राज्यहित में रचनात्मक सुझाव दिए। कांग्रेस की ओर से कुलदीप सिंह राठौर ने भी वित्तीय संकट से बाहर निकलने के लिए मिलकर काम करने की बात कही। उन्होंने भाजपा के बहिष्कार को निंदनीय बताया। हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि आरडीजी व वितिय हालात पर चर्चा के लिए कांग्रेस, माकपा, बसपा, आम आदमी पार्टी व बीजेपी समेत अन्य सभी राजनैतिक दल बैठक मे उपस्थित हुए। राजनैतिक दलो के प्रतिनिधियो ने अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए और चर्चा सार्थक भी रही। लेकिन बीजेपी की ओर से डा. राजीव बिंदल ने बैठक को राजनैतिक मंच बनाए जाने की चेष्ठा की। उन्होने केवल दोषारोपण के अलावा कुछ नही किया, ऐसा लगता है कि बीजेपी की ओर से आए प्रतिनिधी सुनियोजित योजना के तहत केवल लडने के लिए आए थे।
कांग्रेस की ओर से नियुक्त प्रतिनिधी विधायक कुलदीप राठौर ने कहा कि बैठक का मकसद हिमाचल पर आए वितिय संकट की चुनौतियो पर चर्चा करना था। उन्होने कहा कि बैठक सौहार्दपूर्व वातावरण मे शुरु हुई और सभी राजनैतिक दलो के प्रतिनिधियो ने सकारात्मक विचार प्रस्तुत किए। कांग्रेस ने तर्क दिया कि सभी राजनैतिक दल एक जुटता से वर्तमान विकट परिस्थितियो मे सरकार का सहयोग करे। और हिमाचल के वितिय अनुदान की पुनर्बहाली मे अपना योगदान प्रदान करे। लेकिन बीजेपी शुरु से ही इस विषय को लेकर राजनीति करती रही है। वह केवल एक दबाव के कारण बैठक मे उपस्थिती दर्ज करवाने आए थे, अन्यथा लोगो के बीच उनके प्रति एक नकारात्मक संदेश जाता। लेकिन दुर्भाग्य से पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार उन्होने बिना किसी सुझाव के मुख्यमंत्री की बात सुने बगैर ही इस बैठक का बहिष्कार कर दिया। अब विधानसभा मे इस विषय पर चर्चा करेगे।
Raftaar Media | सच के साथ