रफ्तार मीडिया संवाददाता पवन गुप्ता
खलारी : सीसीएल के एनके एरिया अंतर्गत विभिन्न परियोजनाओं में स्वच्छता के नाम पर लाखों रुपये की लागत से बनाए गए सार्वजनिक शौचालय आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। धरातल पर स्थिति यह है कि ये शौचालय आम जनता और कर्मियों की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि महकमे की लापरवाही की वजह से महज शोभा की वस्तु बनकर रह गए हैं।
डकरा परियोजना: पानी गायब, कबाड़खाना बना शौचालय
ताजा और सबसे शर्मनाक उदाहरण डकरा परियोजना में देखने को मिल रहा है। यहाँ लाखों की लागत से निर्मित शौचालय में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। पानी के अभाव में पूरा परिसर गंदगी से बजबजा रहा है। रख-रखाव न होने के कारण पूरा शौचालय अब एक 'कबाड़खाना' में तब्दील हो चुका है। दरवाजों से लेकर खिड़कियां तक जर्जर हो चुकी हैं।जब शौचालय में पानी की बुनियादी सुविधा ही नहीं देनी थी, तो लाखों रुपये पानी की तरह क्यों बहाए गए?
महिला शौचालय पर जड़ा ताला, जंग खा रही हैं व्यवस्थाएं
इस बदहाली का सबसे संवेदनशील और चिंताजनक पहलू महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा है। डकरा परियोजना में मुख्य शौचालय के ठीक सामने महिलाओं के लिए भी एक विशेष शौचालय का निर्माण कराया गया था। लेकिन विडंबना देखिए, इस महिला शौचालय के मुख्य द्वार पर महीनों से ताला लटका हुआ है।ताले पर लग चुका गहरा जंग इस बात का सीधा सबूत है कि इसे बने या बंद हुए लंबा अरसा बीत चुका है। डकरा और आसपास के क्षेत्र से आने वाली महिलाओं को इस घोर लापरवाही के कारण भारी दिक्कतों और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।
तस्वीरें बयां कर रही हैं लापरवाही की दास्तान
कामगारों में भारी आक्रोश, प्रबंधन मौन
स्थानीय लोगों और सीसीएल कर्मियों का कहना है कि सिर्फ फाइलों में 'स्वच्छता अभियान' और 'ओडीएफ' का कोरम पूरा करने के लिए इन शौचालयों का निर्माण कराया गया था। निर्माण के बाद प्रबंधन इन्हें चालू रखना भूल गया। महिलाओं के लिए बने शौचालय पर ताला लटके रहना प्रबंधन की असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है।
अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद सीसीएल एनके एरिया का उच्च प्रबंधन गहरी नींद से जागता है या फिर यह लाखों की सरकारी संपत्ति यूँ ही कबाड़ में तब्दील होती रहेगी।