RERA को लेकर SC की कड़ी टिप्पणी, कहा- “क्यो न इस संस्था को ही समाप्त कर दिया जाए”, मामले में हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों पर लगाई रोक
शिमला। रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (Real Estate Regulatory Authority) रेरा कार्यालय शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने के मामले में सर्वोच्च अदालत ने हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। गुरुवार को मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने RERA पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इन्हें समाप्त कर देना चाहिए। दरअसल, सर्वोच्च अदालत हिमाचल में रेरा से जुड़े मामले में राज्य सरकार की ओर से दायर एसएलपी पर सुनवाई कर रही थी। मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल हाईकोर्ट के उस आदेश पर स्टे लगाया है, जिसमें हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के रेरा दफ्तर शिफ्ट करने के फैसले पर रोक लगा दी थी। मामले में अब अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को होनी है। गुरुवार को नरेश शर्मा बनाम स्टेट ऑफ हिमाचल प्रदेश मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। हिमाचल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सर्वोच्च अदालत पहुंची है। हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से दायर एसएलपी पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार को RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी। इससे पहले हिमाचल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) का कार्यालय शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने के फैसले पर रोक लगा दी थी। मामले पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अगुवाई वाली खंडपीठ ने रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि सभी राज्यों को उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए जिनके लिए रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण बनाया गया था। संस्था बिल्डरों की गलतियों को सहूलियत देने के अलावा यह कुछ नहीं कर रही है। बेहतर होगा कि इस संस्था को ही समाप्त कर दिया जाए।
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