रेंजर सहित वन कर्मियों को ग्रामीणों ने बनाया बंधक
बेरमो / मिथलेश
बेरमो अनुमंडल के गोमिया में जंगली हाथियों के हमले में बीते तीन दिनों के अंदर एक चार वर्षीय बच्चा सहित पांच लोगों की मौत से ग्रामीण आक्रोशित हो गए और वन विभाग की टीम को बंधक बना लिया है। ग्रामीण इतने उत्तेजित थे कि वन विभाग के गाड़ियों में आग लगाने की लगातार बात कर रहे थे वहीं घटना स्तर पर पहुंचे गोमिया क्षेत्र के रेंजर को ग्रामीणों ने बंधक बनाकर अपने साथ बैठाया रखा। JLKM की पूर्व प्रत्याशी पूजा महतो ने रेंजर को हिलायती अंदाज में कहा कि जिस प्रकार से जंगल में अवैध उत्खनन एवं अवैध कटाई हो रहा है जिससे जंगल समाप्त हो रहा है तो जंगली जानवर गांव में पहुंचेंगे और लोगों पर हमला कर उनकी जान लेगा।
लगातार तीसरे दिन हाथियों के हमले से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे महुआ टॉड थाना क्षेत्र के गांगपुर गांव में हाथी ने बड़ी घटना को अंजाम दिया। हाथी के हमले में एक ही परिवार के दो लोगों की मौत सहित तीन को गंभीर रूप से घायल कर दिया। 50 वर्षीय सोमर साव और 4 वर्षीय अमन कुमार जो दादा और पोता है को कुचलकर मार डाला।
स्थानीय लोगों के अनुसार अचानक गांव में घुसे हाथी ने घर के पास मौजूद लोगों पर हमला कर दिया। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ते जा रहे।
मामले को लेकर बोकारो रेंजर बटुकेश्वर पासवान ने कहा कि हम और हमारा क्यू आर टीम दिन रात मेहनत कर हाथियों को भगाने का प्रयास कर रहे हैं। इस घटना में जिन लोगों की भी मौत हुई है उन लोगों को तत्काल 25-25 हजार रुपया मुआवजा राशि उपलब्ध कराया जा रहा है और जो लोग घायल है उनको भी ₹25000 और उनके इलाज का पूरा खर्च विभाग के द्वारा किया जा रहा है। घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को चार-चार लाख रुपया मुआवजा भी सरकारी प्रावधान के अनुसार मिलेगा।
लेकिन सवाल उठता है कि जो तीन लोगों की मौत हाथियों के हमले में हुआ है वह तीनों लोग भी घर में ही थे और आज भी एक चार वर्षीय बच्चे 55 वर्षीय उसके दादा की मौत सहित तीन अन्य लोग जो गंभीर रूप से घायल है हाथियों द्वारा घर में घुसकर हमला किए जाने पर ही हुआ है तो लोग अब कहां जाएं।
ग्रामीणों काफी आक्रोशित है। विभागीय अधिकारियों द्वारा ठोस निर्णय, स्पष्ट नीति और ठोस आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक स्थिति पर कोई अंतिम निर्णय संभव नहीं है।
ग्रामीण का प्रशासन और वन विभाग से स्पष्ट मांग है कि पीड़ित परिवारों को तत्काल मुआवजा, क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था, और जंगली हाथियों के आतंक से निजात के लिए स्थायी एवं प्रभावी समाधान योजना तत्काल लागू की जाए। जनता की जान की सुरक्षा सर्वोपरि है। ग्रामीणों को असुरक्षित छोड़ देना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति पर सख्त जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
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