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आदित्यपुर मेयर चुनाव में सियासी संग्राम तेज, दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की खींचतान के बीच फंसा भाजपा के घोषित समर्थित प्रत्याशी

सरायकेला:आदित्यपुर नगर निगम में मेयर पद के चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। चुनावी मैदान में उतरे नौ प्रत्याशी मतदाताओं के बीच पहुंचकर विकास के वादों और घोषणाओं की झड़ी लगा रहे हैं। हालांकि, इस बार का चुनाव केवल विकास के मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक प्रतिष्ठा और वर्चस्व की लड़ाई बनता नजर आ रहा है।सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के घोषित समर्थित प्रत्याशी को लेकर हो रही है, जो कथित तौर पर दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की सियासी खींचतान के बीच फंसे दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एक ओर दिल्ली से आने वाले बड़े नेता समर्थित प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने की रणनीति बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक पूर्व मुख्यमंत्री अपने करीबी प्रत्याशी को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंके हुए हैं। इससे भाजपा के भीतर गुटबाजी और असमंजस की स्थिति खुलकर सामने आ रही है।स्थानीय स्तर पर भी पार्टी कार्यकर्ताओं में एकजुटता की कमी देखी जा रही है। कहा जा रहा है कि रणनीति बड़े होटलों और बंद कमरों में तैयार हो रही है, जबकि जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय का अभाव नजर आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह स्थिति बनी रही तो इसका सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।

पूर्व मेयर थे भाजपा केडर जिन्होंने किया पूरा निगम का बुरा हाल

पूर्व मेयर के कार्यकाल को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। बताया जाता है कि वे भाजपा कैडर से जुड़े रहे, लेकिन उनके कार्यकाल में निगम क्षेत्र की कई योजनाएं अधूरी रह गईं। ठेकेदारों पर नियंत्रण की कमी और प्रशासनिक शिथिलता के आरोप लगे। कई योजनाओं को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) तक दायर की गई। ऐसे में विपक्ष इन मुद्दों को जोर-शोर से उठा रहा है।

बड़े होटलों के बंद कमरों में हो रही है फोटो सेशन

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भाजपा जिन नेताओं की कभी आलोचना करती थी, आज उन्हें सरायकेला जिले की राजनीति में शामिल कर रही है। बड़े होटलों में आयोजित बैठकों और हाई-प्रोफाइल फोटो सेशन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दल इसे “जमीनी हकीकत से दूरी” का प्रतीक बताकर मतदाताओं के बीच मुद्दा बना रहे हैं।

हार का ठीकरा जिला अध्यक्ष के सिर फोड़े जाने की भी हो सकती है तैयारी

इधर भाजपा के नए जिला अध्यक्ष पर भी बड़ी जिम्मेदारी है। सरायकेला जिले के तीनों नगर निकाय चुनावों में पार्टी समर्थित प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने की कमान उनके हाथ में है। अंदरूनी खींचतान के बीच वे कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच संतुलन साधने में जुटे हैं। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि यदि घोषित समर्थित प्रत्याशी चुनाव में सफल नहीं होते हैं, तो हार की जिम्मेदारी जिला नेतृत्व पर डाली जा सकती है।विपक्षी दल भाजपा की अंदरूनी कलह पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और इसे मतदाताओं के बीच प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं। ऐसे में आदित्यपुर का मेयर चुनाव इस बार खासा दिलचस्प हो गया है।अब देखना होगा कि भाजपा अपनी अंदरूनी खींचतान को सुलझाकर एकजुटता दिखा पाती है या नहीं, क्योंकि मौजूदा हालात में यह चुनाव दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की सियासी प्रतिष्ठा से भी जुड़ता नजर आ रहा है।

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